Old Pension Scheme News – पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर लंबे समय से देशभर के कर्मचारियों में असंतोष था। नई पेंशन स्कीम (NPS) के लागू होने के बाद से कर्मचारियों का यह मानना था कि उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। NPS पूरी तरह बाज़ार आधारित है, जिसमें पेंशन की राशि गारंटीशुदा नहीं होती। इसके चलते कर्मचारियों को भविष्य में मिलने वाले पैसों को लेकर हमेशा असमंजस रहता था। इसके विपरीत OPS में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को उसकी अंतिम तनख्वाह का एक निश्चित प्रतिशत पेंशन के रूप में जीवनभर मिलता था। इसी वजह से कर्मचारी संगठन लगातार OPS की बहाली की मांग करते आ रहे थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाते हुए OPS से जुड़े कर्मचारियों को राहत दी है। कोर्ट का कहना है कि रिटायरमेंट पेंशन सिर्फ आर्थिक मदद नहीं बल्कि यह एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी कर्मचारी से छीना नहीं जा सकता।

OPS की अहमियत और कर्मचारियों की उम्मीदें
OPS की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें रिटायरमेंट के बाद पेंशन निश्चित होती है और हर साल महंगाई भत्ते (DA) के साथ यह बढ़ती रहती है। इससे कर्मचारियों को यह भरोसा रहता था कि उनकी वृद्धावस्था में भी आय का स्थिर स्रोत बना रहेगा। NPS में निवेश शेयर बाज़ार और अन्य योजनाओं पर निर्भर करता है, जिसके कारण इसमें जोखिम ज्यादा है। इसी वजह से लाखों कर्मचारियों ने OPS की बहाली के लिए धरना, प्रदर्शन और आंदोलन तक किए। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन कर्मचारियों की जीत साबित हुआ है जो पिछले कई सालों से इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहे थे। अब उन्हें यह विश्वास मिला है कि रिटायरमेंट के बाद भी उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा और उन्हें हर महीने गारंटीशुदा पेंशन मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा फैसला और उसका असर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताज़ा आदेश में साफ कहा कि OPS से जुड़े कर्मचारियों को यह लाभ दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि रिटायरमेंट पेंशन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है। यह फैसला खासकर उन कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जो 2004 से पहले नियुक्त हुए थे और OPS के दायरे में आते थे। इसके बाद से कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कई राज्यों के संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि सरकार को अब कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और आगे की चुनौतियाँ
फैसले के बाद कई राज्यों में कर्मचारियों ने जश्न मनाया और सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि यह उनकी वर्षों की मेहनत और संघर्ष का नतीजा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि OPS की बहाली से सरकार पर राजकोषीय बोझ ज़रूर बढ़ेगा। लेकिन सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी कदम है। अब आगे की राह सरकार पर निर्भर करती है कि वह किस तरह से इस फैसले को लागू करती है। कई राज्य पहले ही OPS बहाल करने का ऐलान कर चुके हैं, जबकि अन्य राज्य और केंद्र सरकार पर भी दबाव बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि OPS और NPS में संतुलन कैसे बनाया जाता है और किन विभागों में यह योजना पहले लागू की जाती है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल कर्मचारियों बल्कि उनके परिवारों के लिए भी बड़ी राहत है। इससे लाखों लोगों को वित्तीय स्थिरता और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद मिली है। यह निर्णय कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने वाला और सरकारी नौकरी को और आकर्षक बनाने वाला साबित हो सकता है।
