Cooking Oil New Price – हाल ही में सरकार द्वारा खाने वाले तेलों पर लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में कटौती का ऐलान किया गया है, जिससे देशभर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। इस फैसले के बाद खाने के तेलों की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है, खासतौर पर सरसों तेल, रिफाइंड तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की दरों में ₹10 से ₹25 प्रति लीटर तक की कमी आई है। इस निर्णय से ना केवल आम जनता को महंगाई से राहत मिली है, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट, और छोटे खाद्य कारोबारियों के लिए भी यह बहुत फायदेमंद साबित हुआ है। खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए यह निर्णय एक राहत भरी खबर के रूप में सामने आया है। नई कीमतें बाजार में धीरे-धीरे लागू हो रही हैं और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्तों में और भी ज्यादा गिरावट देखने को मिलेगी।

भारत में खाने वाले तेल की कीमतों पर पड़ा असर
GST दरों में कटौती का सीधा असर खाने वाले तेल की कीमतों पर पड़ा है। पहले जहां रिफाइंड और अन्य तेलों पर 5% से 12% तक का टैक्स लगता था, अब इसे घटाकर सिर्फ 5% या उससे कम कर दिया गया है, जिससे कंपनियों को कम कीमत पर तेल बेचने का अवसर मिला है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां महंगाई का असर ज्यादा होता है, वहां यह राहत और भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो रही है। व्यापारी वर्ग भी इस फैसले का स्वागत कर रहा है क्योंकि उन्हें अब अधिक बिक्री की उम्मीद है। सरकार का यह कदम देश में खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर नियंत्रण लाने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
राज्यवार तेल कीमतों में अंतर और लाभ
हालांकि GST में कटौती पूरे देश के लिए लागू हुई है, फिर भी राज्यवार कीमतों में थोड़ा अंतर बना हुआ है। यह अंतर परिवहन लागत, भंडारण शुल्क और स्थानीय टैक्स के आधार पर हो सकता है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश और बिहार में रिफाइंड तेल की कीमत ₹105 से ₹110 के बीच है, वहीं महाराष्ट्र और गुजरात में यही तेल ₹95 से ₹100 प्रति लीटर मिल रहा है। लेकिन कुल मिलाकर, सभी राज्यों में औसतन ₹10 से ₹25 प्रति लीटर की गिरावट आई है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
सरसों, रिफाइंड और अन्य तेलों की नई कीमतें
सरसों तेल जो पहले ₹140 प्रति लीटर बिक रहा था, अब ₹120 से ₹125 तक आ गया है। इसी तरह रिफाइंड तेल की कीमत ₹130 से घटकर ₹105–₹110 हो गई है। सूरजमुखी और सोयाबीन तेल की कीमतों में भी लगभग ₹15 से ₹20 की कमी आई है। व्यापारियों के अनुसार, मांग बढ़ने पर कीमतें और भी स्थिर रह सकती हैं। इस निर्णय से खाद्य वस्तुओं से संबंधित अन्य उद्योगों जैसे नमकीन, स्नैक्स, बिस्कुट आदि की लागत में भी कमी आएगी, जिसका लाभ सीधे उपभोक्ता तक पहुंचेगा। यह बदलाव घरेलू बजट के लिए बेहद राहतदायक साबित हो रहा है।
भविष्य में कीमतों को लेकर क्या अनुमान हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर रहीं और सरकार टैक्स कटौती की नीति को आगे भी जारी रखती है, तो आने वाले महीनों में तेल की कीमतों में और भी गिरावट देखी जा सकती है। साथ ही, अगर कंपनियां इस टैक्स कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं तो यह कदम लंबे समय तक महंगाई नियंत्रण में मददगार रहेगा। सरकार का यह प्रयास निश्चित ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए एक राहत है और इससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
