EPFO Retirement Pension – Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) की पेंशन स्कीम लाखों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सहारा बनती है। लेकिन ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता होता कि उन्हें EPF से कितनी पेंशन मिलेगी और उसका कैलकुलेशन किस आधार पर होता है। EPFO पेंशन का फॉर्मूला मुख्य रूप से आपकी सेवा अवधि (Service Years), आखिरी सैलरी (Pensionable Salary) और योगदान की अवधि पर आधारित होता है। यदि आपने लंबे समय तक EPF में योगदान किया है और आपकी अंतिम सैलरी अधिक रही है, तो पेंशन भी ज़्यादा मिलेगी। इसके अलावा, EPS-95 के तहत पेंशन कैलकुलेट करने के लिए एक विशेष फॉर्मूला अपनाया जाता है जिसे कई लोग नहीं समझ पाते।

EPFO पेंशन कैलकुलेशन फॉर्मूला क्या है?
यहां ‘पेंशन योग्य सैलरी’ का मतलब होता है आपकी आखिरी 60 महीनों की औसत बेसिक सैलरी और डीए। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹15,000 है और उसने 30 साल तक सेवा की है, तो उसकी मासिक पेंशन होगी: (15000 × 30) ÷ 70 = ₹6,428. यह पेंशन जीवन भर दी जाती है और इसके लिए कर्मचारी को कम से कम 10 साल की सर्विस पूरी करनी ज़रूरी होती है। हालांकि यह फॉर्मूला सिर्फ EPS भाग पर लागू होता है, PF में जमा राशि एकमुश्त अलग से मिलती है। यह फॉर्मूला समझने से लोग अपनी पेंशन की पहले से प्लानिंग कर सकते हैं।
PF बैलेंस और EPS पेंशन में क्या फर्क है?
बहुत से लोग यह मानते हैं कि उनका पूरा PF बैलेंस उन्हें पेंशन के रूप में मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। EPFO में दो भाग होते हैं – EPF (Provident Fund) और EPS (Pension Scheme)। EPF में जमा पूरा पैसा रिटायरमेंट पर एकमुश्त मिलता है जबकि EPS वाला हिस्सा पेंशन के रूप में मासिक भुगतान में आता है। आमतौर पर कर्मचारी के EPF योगदान का 12% सीधे PF अकाउंट में जाता है, जबकि नियोक्ता का 8.33% हिस्सा EPS में और बाकी 3.67% EPF में जमा होता है। EPS में जमा पैसा सरकार द्वारा पेंशन फंड में ट्रांसफर किया जाता है और यहीं से पेंशन तय की जाती है। इसलिए केवल EPS हिस्से के आधार पर ही मासिक पेंशन दी जाती है और PF बैलेंस का इससे कोई सीधा संबंध नहीं होता।
10 साल की सर्विस पूरी करने पर ही पेंशन का अधिकार
EPFO की EPS योजना के अंतर्गत पेंशन पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम 10 साल की सर्विस पूरी करनी होती है। यदि कोई कर्मचारी 10 साल से कम समय तक EPS में योगदान देता है और फिर नौकरी छोड़ देता है, तो वह पेंशन के लिए पात्र नहीं होता। हालांकि, वह EPS में जमा राशि को निकाल सकता है। यदि कोई व्यक्ति 58 वर्ष की आयु पर रिटायर होता है और 10 साल से ज़्यादा सेवा पूरी करता है, तो उसे पेंशन मिलनी शुरू हो जाती है। इसके अलावा, कर्मचारी चाहे तो 50 वर्ष की उम्र के बाद भी रिटायर होकर पेंशन के लिए आवेदन कर सकता है, लेकिन उसे ‘रिड्यूस्ड पेंशन’ मिलेगी। यह नियम उन लोगों के लिए बेहद अहम है जो बार-बार नौकरी बदलते हैं या जल्दी नौकरी छोड़ देते हैं।
रिटायरमेंट के समय कितना मिलेगा EPF का पैसा और पेंशन?
रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को दो हिस्सों में पैसा मिलता है – पहला है EPF बैलेंस जो एकमुश्त निकाला जा सकता है, और दूसरा है EPS पेंशन जो हर महीने दी जाती है। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 30 साल तक ₹15,000 की पेंशन योग्य सैलरी पर काम किया, तो उसे लगभग ₹6,428 मासिक पेंशन मिलेगी। वहीं, EPF बैलेंस उसकी पूरी नौकरी के दौरान जमा राशि + ब्याज के साथ मिलकर लाखों रुपए का हो सकता है।
