LIC Pension Yojana – एलआईसी की पेंशन योजनाएँ उन लोगों के लिए भरोसेमंद विकल्प मानी जाती हैं जो रिटायरमेंट के बाद हर महीने निश्चित आय चाहते हैं। ₹15,000 मासिक पेंशन का लक्ष्य पूरा करने के लिए आप Immediate Annuity (तुरंत पेंशन) या Deferred Annuity (कुछ साल बाद शुरू होने वाली पेंशन) जैसे विकल्प चुन सकते हैं—जैसे LIC Jeevan Shanti (Deferred/Immediate विकल्पों के साथ) या Saral Pension जैसी सरल, मानकीकृत पॉलिसियाँ। इन योजनाओं में एकमुश्त “Purchase Price” जमा कर के आप जीवनभर के लिए तय दर पर पेंशन पाते हैं; दर (annuity rate) उम्र, चुने गए विकल्प (सिंगल/जॉइंट लाइफ, रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस, इत्यादि) और बाजार स्थितियों पर निर्भर करती है। ₹15,000 मासिक पाने के लिए आवश्यक पूँजी 50–65 वर्ष की आयु, चुने गए विकल्प और दर के अनुसार बदल सकती है; मोटे तौर पर, “रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस” जैसे सुरक्षा-भरे विकल्प चुनने पर अपेक्षित पूँजी अधिक पड़ती है, जबकि बिना-रिटर्न विकल्पों में थोड़ी कम।

₹15,000 मासिक पेंशन का लक्ष्य: कितनी पूँजी लगेगी?
₹15,000 प्रति माह यानी ₹1,80,000 सालाना पेंशन के लिए कितनी एकमुश्त राशि चाहिए, इसका अनुमान annuity rate से लगता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी 60-वर्षीय आवेदक को “रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस” (ROP) के साथ लगभग 7.5%–8% के समतुल्य वार्षिक प्रभावी भुगतान का कोट मिलता है, तो ₹1,80,000/वर्ष पाने हेतु अनुमानित परचेज प्राइस ~₹22–24 लाख के दायरे में बैठ सकता है। वहीं, यदि “बिना ROP” विकल्प चुना जाए, जहाँ मृत्यु पर परचेज प्राइस वापस नहीं मिलता, तो कोट आम तौर पर थोड़ा बेहतर आता है और अनुमानित पूँजी ~₹19–21 लाख तक घट सकती है। Deferred (माने, पेंशन 5–10 वर्ष बाद शुरू) लेने पर, डिफरल अवधि में दरें/टेबल्स अलग हो सकती हैं और वही राशि कम पूँजी से संभव दिखे। ध्यान रहे—ये सिर्फ सांकेतिक आँकड़े हैं; वास्तविक कोट आपकी आयु, विकल्प, भुगतान आवृत्ति (मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक) और उस समय की दरों पर निर्भर होंगे।
पात्रता, विकल्प और ज़रूरी दस्तावेज़
एलआईसी की अधिकांश पेंशन योजनाओं में प्रवेश आयु सामान्यतः 40–80 वर्ष के बीच रहती है (प्लान-विशिष्ट बदलाव संभव)। पहचान के लिए PAN/आधार/पासपोर्ट, पते के लिए आधार/यूटिलिटी बिल, बैंक विवरण (रद्द चेक/पासबुक), और आयु-प्रमाण देना होता है; उच्च परचेज प्राइस पर मेडिकल/अंडरराइटिंग भी हो सकती है। विकल्पों में Single Life (केवल मुख्य जीवन पर) और Joint Life (पति/पत्नी दोनों पर) शामिल हैं; Joint Life में प्रथम जीवन की मृत्यु के बाद भी पेंशन जारी रह सकती है। “Return of Purchase Price (ROP)” चुनने पर जीवनांत में नामांकितों को मूल रकम लौटती है; “Without ROP” में पेंशन अधिक पर मूल रकम नहीं मिलती। Deferred Annuity में आप डिफरल अवधि चुनते हैं—पेंशन बाद में शुरू होती है, बदले में संभावित दर/बेनिफिट टेबल अलग होते हैं।
स्टेप-बाय-स्टेप: आवेदन और पॉलिसी सेटअप
लक्ष्य तय करें—आपको आज की कीमतों पर ₹15,000/माह चाहिए या भविष्य की मुद्रास्फीति जोड़कर अधिक? परिवार संरचना देखें—सिंगल लाइफ़ पर्याप्त है या जॉइंट लाइफ़ बेहतर सुरक्षा देगा? अधिकृत एलआईसी सलाहकार/ब्रांच/आधिकारिक वेबसाइट पर अलग-अलग विकल्पों के कोट लें; “ROP vs Without ROP”, “Immediate vs Deferred” सभी का तुलनात्मक नक़्शा बनाएं। KYC, आयु-प्रमाण, बैंक NEFT विवरण और नामांकन तैयार रखें; बड़े टिकट पर मेडिकल/अंडरराइटिंग की संभावना मानकर समय रखें। भुगतान आवृत्ति (मासिक उत्तम) और पेंशन प्रारंभ तिथि सुनिश्चित करें; Deferred चुनें तो डिफरल अवधि लॉक होगी।
टैक्स, जोखिम और स्मार्ट टिप्स
भारत में एन्युटी से मिलने वाली पेंशन को सामान्य आय की तरह टैक्स-योग्य माना जाता है—आपके टैक्स स्लैब के अनुसार liability बनेगी; TDS/घोषणा नियम बदल सकते हैं, इसलिए हर साल अपडेट लें। मुद्रास्फीति जोखिम वास्तविक है—स्थिर पेंशन समय के साथ क्रय-शक्ति खो सकती है; इसलिए सम्पत्ति-वितरण में ऐसी संपत्तियाँ रखें जो दीर्घकाल में वृद्धि दें। तरलता सीमित रहती है—Immediate Annuity में surrender/loan के विकल्प बहुत सीमित होते हैं; इसलिए आपातकालीन फंड अलग रखें। Joint Life/ROP से सुरक्षा बढ़ती है पर दरें तुलनात्मक रूप से कम दिख सकती हैं—फिर भी परिवार-सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
