Gold Silver Price – त्योहारों के मौसम में सोना और चांदी के दामों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। 25 अक्टूबर से बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भावों में जबरदस्त कमी आई है, जिससे निवेशकों और आम ग्राहकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल के दामों में गिरावट का असर सीधे तौर पर सोना-चांदी की कीमतों पर पड़ा है। भारतीय बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम करीब ₹1,200 तक नीचे आ गई है, जबकि चांदी में प्रति किलो ₹1,800 की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट हो सकती है, जो निवेश के लिए सुनहरा मौका साबित हो सकता है।

भारत में सोने की कीमतों में बदलाव
भारत में सोने की कीमतें हमेशा से आर्थिक स्थिति, विदेशी बाजार और मुद्रा विनिमय दर पर निर्भर करती हैं। इस बार अक्टूबर की शुरुआत से ही निवेशकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज आया है क्योंकि सोना करीब ₹1,200 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के रेट में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन लोगों को राहत मिली है जो दिवाली या शादी के मौसम में गहने खरीदने की योजना बना रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय सोने में निवेश के लिए सबसे उपयुक्त है क्योंकि आने वाले महीनों में इसके दाम फिर से बढ़ सकते हैं।
चांदी के रेट में तेज गिरावट से बाजार में हलचल
चांदी के भावों में आई गिरावट ने ज्वेलरी मार्केट में नई हलचल पैदा कर दी है। 25 अक्टूबर से चांदी के दामों में प्रति किलो लगभग ₹1,800 की गिरावट दर्ज की गई है। इससे औद्योगिक उपयोगकर्ताओं और छोटे निवेशकों को राहत मिली है। इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोटिव सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण इसकी कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि डॉलर इंडेक्स में मजबूती बनी रहती है तो चांदी के दामों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। यह स्थिति चांदी खरीदने वालों के लिए भी बेहतर अवसर लेकर आई है।
सोने-चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि के संकेतों के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर रुख किया है, जिससे कीमती धातुओं की मांग घट गई है। इसके अलावा मध्य-पूर्व और यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में मंदी का माहौल है। इस कारण भारत जैसे देशों में भी सोना-चांदी के दामों में कमी आई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि साल के अंत तक जब फेस्टिव डिमांड बढ़ेगी, तब कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं।
निवेशकों के लिए मौजूदा समय में बड़ा मौका
सोना और चांदी में आई गिरावट निवेशकों के लिए एक सुनहरा मौका लेकर आई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अभी जो भाव चल रहे हैं, वे पिछले तीन महीनों में सबसे निचले स्तर पर हैं। जो लोग दीर्घकालिक निवेश की सोच रहे हैं, उनके लिए यह सही समय है कि वे सोने या चांदी में निवेश करें। शादी के मौसम से पहले खरीदारी करने पर ग्राहकों को अच्छा फायदा मिल सकता है। आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भारतीय मांग में वृद्धि के कारण सोने-चांदी के दामों में तेजी आने की संभावना है। ऐसे में अक्टूबर का महीना खरीदारी के लिहाज से बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
