B.ED D.EL.ED New Rule : बीएड और डीएलएड हेतु नया नियम हुआ जारी

B.ED D.EL.ED New Rule – बीएड (B.Ed) और डीएलएड (D.El.Ed) करने वाले लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने 2025 के लिए इन दोनों पाठ्यक्रमों के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब इन कोर्स को करने की प्रक्रिया और भी सख्त और मानकीकृत हो गई है। इन नए नियमों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना, फर्जी डिग्री और गलत प्रवेश प्रक्रियाओं को रोकना है। खास बात यह है कि अब बीएड और डीएलएड में प्रवेश के लिए अर्हता, आयु सीमा, इंटर्नशिप और मूल्यांकन प्रणाली में कई बदलाव किए गए हैं। इसके साथ ही अब प्रशिक्षु शिक्षकों को स्कूल स्तर पर ज्यादा प्रैक्टिकल अनुभव लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए बदलाव से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में योग्य और समर्पित शिक्षक तैयार होंगे जो स्कूल शिक्षा को नई दिशा देंगे। इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि बीएड और डीएलएड में क्या नया हुआ है और इसका छात्रों पर क्या असर पड़ेगा।

B.ED D.EL.ED New Rule
B.ED D.EL.ED New Rule

बीएड कोर्स के लिए नया नियम: पात्रता और इंटर्नशिप सख्त

2025 से बीएड कोर्स में प्रवेश पाने के लिए स्नातक में न्यूनतम 50% अंक होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही अब इंटर्नशिप की अवधि 4 महीने से बढ़ाकर 6 महीने कर दी गई है, ताकि छात्र स्कूल स्तर पर बेहतर अनुभव ले सकें। इसके अलावा, मूल्यांकन प्रणाली को डिजिटल कर दिया गया है जिससे हर छात्र की गतिविधि का रियल टाइम ट्रैकिंग संभव हो सके। नए नियमों के अनुसार, बीएड कोर्स अब 2 वर्ष के बजाय 4 वर्ष के इंटीग्रेटेड कोर्स के रूप में भी किया जा सकता है, जो 12वीं पास छात्रों के लिए उपलब्ध होगा। इन बदलावों का उद्देश्य शिक्षकों को केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि व्यवहारिक ज्ञान भी देना है। इससे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और प्रशिक्षित शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

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डीएलएड पाठ्यक्रम के लिए नई शर्तें और ऑनलाइन प्रक्रिया

डीएलएड में दाखिले के लिए अब न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं में 50% अंकों की गई है और आरक्षित वर्गों को 5% की छूट दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी। इसके अलावा, जिन छात्रों की उपस्थिति 80% से कम होगी, उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। डीएलएड के दौरान हर छात्र को कम से कम दो सरकारी स्कूलों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देनी होगी। इस कोर्स को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए अब पाठ्यक्रम में NEP 2020 के अनुसार बदलाव किए गए हैं। साथ ही, कोर्स की नियमित मॉनिटरिंग और फीडबैक सिस्टम लागू किया गया है।

छात्रों के लिए आवश्यक बदलाव: अब सख्त होंगे मूल्यांकन मानक

बीएड और डीएलएड कोर्स में अब छात्रों की उपस्थिति, इंटर्नशिप रिपोर्ट, स्कूल प्रैक्टिकल, सेमेस्टर परीक्षा और प्रस्तुति (Presentation) के आधार पर संयुक्त मूल्यांकन किया जाएगा। पहले जहां सिर्फ लिखित परीक्षा ही अंतिम मूल्यांकन का आधार होती थी, अब व्यवहारिक और शैक्षणिक दोनों पक्षों को महत्व मिलेगा। इससे केवल किताबी ज्ञान पर निर्भरता नहीं रहेगी और छात्रों की वास्तविक शिक्षण क्षमता उभरकर सामने आएगी। शिक्षा बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्रों को कोर्स के दौरान समय-समय पर फीडबैक देना होगा और फॉर्मेटिव असेसमेंट रिपोर्ट जमा करनी होगी।

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भविष्य के शिक्षकों के लिए नई उम्मीद: सरकारी नौकरी की राह आसान

नए नियमों के लागू होने के बाद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है, जिससे प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग बढ़ेगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि बीएड और डीएलएड धारकों को प्राथमिकता देकर स्कूलों में खाली पदों पर जल्द भर्ती की जाएगी। साथ ही, इन कोर्स के बाद टीईटी (TET) या सीटीईटी (CTET) जैसी पात्रता परीक्षाओं को पार करना अनिवार्य होगा, जिससे योग्य उम्मीदवारों की पहचान आसान होगी।

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